१५ श्रावण २०७८, शुक्रबार

गजल: रामदेब रत्गैयाँ

तोहार दिन चाहे रात मै, अश्या लागतु
तोहार यादेयादलेभरल मै, बग्या बनाईतु
जुनीभर साथ देतीजैना, बाचा कसम खैती
तोहार ऊ ध्यार मायाके मै, गथ्या बनाईतु
हिरामोती धन नाई, तोहार माया हुईत पुगि
तोहार व मोर भ्वाजकला मै, जग्या बनाईतु
चाहे गोरी रहो या काली, तु मोर हुलसे पुगि
तोहार व मोर मायाके ला मै, सग्या बनाईतु
दिलसे तु मोर हुुईतो कैदेऊ, वत्र कबोत पुगि
तोहार व मोर मायाले बधल मै, गट्या बनाईतु
रामदेब रत्गैयाँ
राजापुर–२, नयाँगाउँ, बर्दिया
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